नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने भारत में ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की है। न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक बातचीत के दौरान अल्बानीज़ ने भारत में बिजली, खाना पकाने के ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा की पहुंच के विस्तार का उल्लेख किया।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत पिछले कुछ वर्षों में घरेलू ऊर्जा पहुंच, विद्युतीकरण और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
उज्ज्वला योजना से LPG कनेक्शन का विस्तार
भारत में स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना एक प्रमुख पहल रही है। योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को LPG कनेक्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक LPG कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके थे।
इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों तक LPG की पहुंच बढ़ाना है, जहां पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता अधिक रही है।
सौभाग्य योजना से बिजली कनेक्शन
ग्रामीण और दूरदराज के परिवारों तक बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना भी महत्वपूर्ण रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 तक योजना के तहत लगभग 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया था।
इससे देश में घरेलू विद्युतीकरण को आगे बढ़ाने के प्रयासों को गति मिली।
सौर ऊर्जा पर बढ़ता जोर
भारत की ऊर्जा रणनीति में विकेंद्रीकृत और घरेलू सौर ऊर्जा की भूमिका भी बढ़ रही है।
PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के तहत घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अगस्त 2026 तक इस योजना से जुड़े लाभार्थी परिवारों की संख्या 50 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी थी।
इसी तरह PM-KUSUM योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत किसानों के लिए सोलर पंप और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को प्रोत्साहित किया जाता है।
दिसंबर 2025 तक योजना से 21.77 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए थे।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयात स्रोतों में विविधता
भारत की ऊर्जा सुरक्षा केवल घरेलू उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा तक सीमित नहीं है। देश ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी अपने आयात स्रोतों को विविध बनाने पर जोर दिया है।
पिछले दशक में भारत के ऊर्जा आयात के स्रोतों की संख्या 27 देशों से बढ़कर 41 देशों तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना और वैश्विक आपूर्ति में आने वाले व्यवधानों के बीच ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी इसी व्यापक ऊर्जा-सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच LNG सहित ऊर्जा आपूर्ति और सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होती रही है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में आर्थिक सहयोग पर जोर
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं माना। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, विश्वविद्यालयों और लोगों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बात की।
उन्होंने भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी में अभी और संभावनाएं मौजूद हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में संपर्क बढ़ा है।
क्रिकेट और सांस्कृतिक संबंध भी चर्चा में
अल्बानीज़ ने भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में खेल और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी उल्लेख किया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट दोनों देशों के लोगों के बीच लोकप्रिय संपर्क का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने भारत में प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में मिलने वाली बड़ी जनभागीदारी का भी जिक्र किया।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों के सहयोग को और बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
आगे सहयोग की गुंजाइश
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की टिप्पणी भारत की ऊर्जा पहुंच में हुए विस्तार और दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्धता, घरेलू विद्युतीकरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।
वहीं, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा, व्यापार, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं दोनों देशों की साझेदारी को व्यापक आधार दे सकती हैं।
WorldLens निष्कर्ष: भारत की ऊर्जा यात्रा अब केवल बिजली कनेक्शन तक सीमित नहीं है। LPG, रूफटॉप सोलर, कृषि सौर ऊर्जा और विविध ऊर्जा आयात स्रोतों के साथ देश की ऊर्जा रणनीति कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री की हालिया टिप्पणी ने इसी बदलाव को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।










